Tuesday, November 25, 2008

To our Friendship


वो लम्हे वो पल बहुत याद आते हैं

वो tuts की रातें वो बेमतलब बातें

वो जगमग दिवाली, वो अपनी बेमौसम होली

वो अपना शोरगुल वो अपने गानों की धुन

वो exams के पहले की tension

पहले कुछ ना पढ़ना फ़िर सारी रात जगना

वो अपनी nightwalks, वो CBRI की icecream

वो दिनभर की छेड़खानी वो hostel की रौनक

वो canteen में tiger biscuit और नीबू पानी

आज भी ताज़ा हैं दिल में वो यादें पुरानी

आँखें बंद करो तो लगता है ऐसा

चारों हम साथ में हैं अब भी

जब खुलती है आँख तो हैं सब अकेले

मन करता है हर पल सपनों में जीतें रहें

जाने अब कब मिलेंगे, कब होंगे साथ हम

फ़िर कब जमेगी हम चारों की महफिल

जाने वोह खुशगवार पल कब आएगा

और ये इंतज़ार मुझसे कितनी शायरी लिखवायेगा...

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