वो लम्हे वो पल बहुत याद आते हैं
वो tuts की रातें वो बेमतलब बातें
वो जगमग दिवाली, वो अपनी बेमौसम होली
वो अपना शोरगुल वो अपने गानों की धुन
वो exams के पहले की tension
पहले कुछ ना पढ़ना फ़िर सारी रात जगना
वो अपनी nightwalks, वो CBRI की icecream
वो दिनभर की छेड़खानी वो hostel की रौनक
वो canteen में tiger biscuit और नीबू पानी
आज भी ताज़ा हैं दिल में वो यादें पुरानी
आँखें बंद करो तो लगता है ऐसा
चारों हम साथ में हैं अब भी
जब खुलती है आँख तो हैं सब अकेले
मन करता है हर पल सपनों में जीतें रहें
जाने अब कब मिलेंगे, कब होंगे साथ हम
फ़िर कब जमेगी हम चारों की महफिल
जाने वोह खुशगवार पल कब आएगा
और ये इंतज़ार मुझसे कितनी शायरी लिखवायेगा...
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